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कैलाश मानसरोवर यात्रा वृतांत द्वारा राजीव गुप्ता

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आधुनिकीकरण के इस दौर में वर्तमान समय तथ्य – आधारित है परंतु यह भी सत्य है कि आस्था और तथ्य दो अलग – अलग बातें हैं. विज्ञान की भाषा में प्रकृति का आधार ऊर्जा है तो आस्था का आधार भाव है. आस्था की धुरी का केन्द्रबिन्दु इस भाव पर टिका है कि प्रकृति में एक सर्वशक्तिमान शक्ति है जो प्रकृति की नियंता है, उसे ही भगवान की संज्ञा दी जाती है. भारतीय चिंतन के अनुसार व्यक्ति जिस भाव से भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करता है, उसी अनुरूप उसे भगवान का सान्निध्य मिलता है. इसी आस्था के चलते हिन्दुओं की ऐसी मान्यता है कि हिमालय के कैलाश – पर्वत पर साक्षात शिव का विश्राम  है. परिणामत: कैलाश – पर्वत हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है और लगभग प्रत्येक हिन्दू अपने जीवन में एक बार कैलाश – मानसरोवर का दर्शन करना चाहता है. कैलाश – पर्वत सुनते ही हमें बर्फ से ढका हुआ एक अर्ध - गोलाकारनुमा – सा एक पर्वत ध्यान में आता है और उस सफेद बर्फ से ढके पर्वत को ध्यान करते ही मन में एक शांति का अनुभव होता है. ऐसी मानसिक शांति जहाँ पर वैचारिक उथल – पुथल का ज्वार शांत होता हुआ अनुभूत होता है. साक्षात कैलाश के दर्शन करते समय…

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