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जग जलेगा

सच कहेगा तो मरेगा दुश्मनी से घर जलेगा झूठ यारो सर धुनेगा हाल दिल का कब सुनेगा कोठरी दिल गम पलेगा दिल है दर्पण सच कहेगा साथ तू है जग जलेगा गुमनाम पिथौरागढ़ी

मर कर जीना सीख लिया

अब दुःख दर्द में भी मैने मुस्कुराना सीख लिया जब से अज़ाब को छिपाने के सलीका सीख लिया।
बेवफाओं से इतना पड़ा पाला कि अब इल्तिफ़ात से भी किनारा लेना सीख़ लिया।
झूठे कसमें वादों से अब मैं कभी ना टूटूंगा ग़ार को पहचानने का हुनर जो सीख लिया।
वो कत्लेआम के शौक़ीन हैं तो क्या हुआ मैंने भी तो अब मर के जीने का तरीका सीख़ लिया।
सुनसान रास्तों पर चलने से अब डर नहीं लगता मैंने अब इन पर आना-जाना सीख लिया। 
शब्दार्थ :::
इल्तिफ़ात- मित्रता
ग़ार- विश्वासघात अज़ाब - पीड़ा

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