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एक चिट्ठी मिली ..... मेरे यार की --- -(लक्ष्मी नारायण लहरे )
बरसों की खबर -खबर बनकर रह गयी  गलियों की चौड़ाई सिमट गयी  उपाह-फोह की आवाज कमरे में दम तोड़ दी  बदल ,गयी लोग -बाक की भाषा  नजरें बदल गयी नया बरस आ गया  ख़बरों में नई उमंग -तरंग नए संपादक आ गए  गलियां में  जो हवा बह रही थी  ओ हवा प्रदूषित हो गयी  प्यार करने वाले पथिक  अपनी राह बदल दी  लोगों का भ्रम जब टूटा  पथिक की नई कहानी बन गयी  सच है ,भ्रम का कोई पर्याय नहीं होता  मृत्यु निश्चित है पर  उस पर किसी का विचार नहीं जमता  जीने की कवायद जारी है  कोई प्रेम से , नफरत नहीं करता  समाज और परिवार का कोई नाम बदनाम नहीं करता  लोग हंसते  इसलिए  परिवार प्रेम पर विश्वाश नहीं करता  मेरे यार की खबर है ..... एक चिट्ठी मिली है  .. प्रेम पत्र , नहीं -नहीं  बधाई -पत्र  है  नए वर्ष की  लिखा है .... दोस्ती करके किसी को धोखा ना देना  दोस्त को आंसू का तोहफा ना देना  कोई रोये आपको याद करके ... जिंदगी में किसी को ऐसा मौका ना देना  नव वर्ष हो मंगलमय !  ऐसा सन्देश हर अंतिम ब्यक्ति को लिखना ...

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