Posts

Showing posts from February, 2012

अवनीश सिंह चौहान को थिंक क्लब वार्षिक पुरस्कार

Image
संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित द थिंक क्लब(http://www.thethinkclub.com/) ने पूर्वाभास
(http://www.poorvabhas.in/) के संपादक अवनीश सिंह चौहान को हिंदी भाषा
और साहित्य की उन्नति हेतु थिंक क्लब वार्षिक पुरस्कार से सम्मानित करने
की घोषणा की है। थिंक क्लब हिंदी भाषा की उन्नति के लिए प्रतिबद्ध है। इस
हेतु 'थिंक क्लब' ने इस वर्ष हिंदी जगत के अज्ञात तथा संघर्षरत लेखकों को
पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की थी। पुरस्कार की रकम १५,००० (भारतीय
रुपया) है। थिंक क्लब का मानना है कि पूर्वाभास के द्वारा किया गया
प्रयास हिंदी जगत के संघर्षरत कवियों ओर लेखकों को एक आवश्यक मंच प्रदान
करता है।

इसी कारण यह पुरस्कार पूर्वाभास के प्रयत्न को प्रोत्साहित करने हेतु
संपादक चौहान को दिया गया है। पिछले वर्ष यह पुरस्कार मेरी रोच की
अंग्रेजी पुस्तक 'पेकिंग फॉर मार्स' को प्रदान किया गया था। थिंक क्लब की
ओर से पुरस्कार चयन समिति ने चौहान को हार्दिक बधाई देते हुए कामना की है
कि उनका यह रचनात्मक कार्य अनवरत चलता रहे। इस पुरस्कार हेतु चयन समिति
के अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव (प्रबंध सम्पादक, थिंक क्लब
पब्लिकेशन्स,ब्लूमफील्ड हिल्स,…

उजालों के रास्ते......दीपक शर्मा

Image
वैसे ही बहुत कम हैं उजालों के रास्ते,
फिर पीकर धुआं तुम जीतो हो किसके वास्ते,

माना जीना नहीं आसान इस मुश्किल दौर में
कश लेके नहीं निकलते खुशियों के रास्ते

जिन्नात नहीं अब मौत ही मिलती है रगड़ कर,
यूँ सूरती नहीं हाथों से रगड़ के फांकते ,

तेरी ज़िन्दगी के साथ जुडी कई और ज़िन्दगी,
मुकद्दर नहीं तिफ्लत के कभी लत में वारते ,

पी लूं जहाँ के दर्द खुदा कुछ ऐसा दे नशा ,
"दीपक" नहीं नशा कोई गाफिल से पालते ,

मेरी माँ ------(मुस्तकीम खान)

जन्नत मुजको दिला दी जिसने दुनिया मैं
वो हे मेरी माँ
दुनिया मैं जीने का हक दिया मुजको
वो हे मेरी माँ
कचरे का डेर नदिया किनारा था मेरा
मुजको अपनी दुनिया ली
वो हे मेरी माँ
रात का अंधेरा मेरी आखो का डर
मेरे डर मेरी ताकत बनी
वो हे मेरी माँ
मैं डर क़र ना सोया पूरी रात कभी
मेरे लिए जागकर मुझे सुलाया
वो हे मेरी माँ
कभी परेशानी मेरा सवब जो बनी
मेरे रास्ते मैं फूल जिसने बिखेरे
वो हे मेरी माँ
मेरे जुर्म की सजा खुद ने
पाई मुजको अपने आचल मैं छुपा लिया
वो हे मेरी माँ
मंदिर मस्जिद ना किसी की खबर मुजको
ना गीता कुरान का ज्ञान मुजको
फिर भी मुजको जहन्नुम से बचायवो
वो हे मेरी
माँ कहते हे
लोग माँ के कदमो मैं जन्नत होती
हे मैंने कहा
जन्नत से भी जो उपर
हे वो हे मेरी माँ

कौन तेरा मार्ग रोके?-----(अभिषेक )

पश्चिम से
उन्मुक्त लहर आई है ,
खजूर के वो पेड़ के
मधुर मिलन की खबर लायी है!

तूफ़ान ने तो दो
पेड़ो को मिला दिया !
जो हम नहीं कर सकते
उन्होंने सिखा दिया !

प्रेम भी तो तूफ़ान है
सदभावनाओं की खान है
जो
अन्दर से भी
पाताल के बहते
निर्झर के जैसा है!

और
शक्ति अपार उस
तांडव जट्टाधारी से
प्रकट हो तो वो
एक प्रलय के जैसा है !

जो हुआ ऐसा अंत
तब
कौन ये विधान रोके?
कौन ये तूफ़ान रोके?

वो डूबता सूरज
भी आ गया है
अब सवार हो
अपने श्वेत घोड़े पर !

इस अनोखे दृश्य के
होंगे हम मनुहारी
साक्षी होगा स्वयं
इस काल का पहर !

गगन और धरा
हो जायेंगे संग संग
तब
कौन ये साकार रोके
कौन ये एकाकार रोके ?

क्षितिज समेटे हैं
कुछ लाल ,पीले
वैगनी ,हरे रंगों को
जो सूरज और वर्षा के
उत्त्साह्पूर्ण नृत्य
और धुल -कणों के
पुष्प वर्षा से निर्मित है


धरा -नभ के मिलन हेतु वो
एक सेज सजाते हैं क्षितिज पर
और बादलों के सफ़ेद टूकड़ों से
आलोकित है

इतने विहंगम दृश्यों
का जब अवलोकन है
तब
कौन ये बहार रोके?
कौन ये मनुहार रोके?

जा ,
गगन और धरा आज एक हो जायेंगे
इन्द्रधनुषी झूले पर
बादलों के आवारण में ,
आज,
तू भी बढ़
अपने मंजिल पर अब !

तुझे बढ़ना है अपने
लक्ष्य के आरोहन में
साहस का रंग संग तेरे है जब !

अंगद की…

Popular posts from this blog

minister ananth kumar ananth kumar death holiday ananth kumar holiday

भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा आकांक्षा यादव को ‘’डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2011‘‘

तू ही रहे साथ मेरे

देश के भविष्य