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Showing posts from December, 2011

नववर्ष की शुभकामनायें

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नया वर्ष आ गया; वर्ष 2012 आ गया; पुराना वर्ष 2011 चला गया। इस समय समाचारों में लोगों का उत्साह दिखाया जा रहा है। घर के कमरे में बैठे-बैठे हमें यहां उरई में खुशी में फोड़े जा रहे पटाखों का शोर सुनाई दे रहा है। लोगों की खुशी को कम नहीं करना चाहते, हमारे कम करने से होगी भी नहीं। कई सवाल बहुत पहले से हमारे मन में नये वर्ष के आने पर, लोगों के अति-उत्साह को देखकर उठते थे कि इतनी खुशी, उल्लास किसलिए? पटाखों का फोड़ना किसलिए? रात-रात भर पार्टियों का आयोजन और हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी किसलिए? कहीं इस कारण से तो नहीं कि इस वर्ष हम आतंकवाद की चपेट में नहीं आये? कहीं इस कारण तो नहीं कि हम किसी दुर्घटना के शिकार नहीं हुए? कहीं इस कारण तो नहीं कि हमें पूरे वर्ष सम्पन्नता, सुख मिलता रहा? इसके बाद भी नववर्ष के आने से यह एहसास हो रहा है कि बुरे दिन वर्ष 2011 के साथ चले गये हैं और नववर्ष अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर ही आयेगा। देशवासियों को सुख-समृद्धि-सफलता-सुरक्षा आदि-आदि सब कुछ मिले। संसाधनों की उपलब्धता रहे, आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे। कामना यह भी है कि इस वर्ष में बच्चियां अजन्मी न रहें; कामना …

‘‘बातें हिन्दी व्याकरण की’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

कुछ बातें हिन्दी व्याकरण की अक्षर “अक्षर” के नाम से ही जान पड़ता है कि जिसका क्षर (विभाजन) न हो सके उन्हे “अक्षर” कहा जाता है! वर्ण अक्षर किसी न किसी स्थान से बोले जाते हैं। जिन स्थानों से उनका उच्चारण होता है उनको वरण कहते हैं। इसीलिए इन्हें वर्ण भी कहा जाता है। स्वर जो स्वयंभू बोले जाते हैं उनको स्वर कहा जाता है। हिन्दी व्याकरण में इनकी संख्या २३ मानी गई है। हृस्व     दीर्घ     प्लुत अ        आ         अ ३ इ         ई          इ ३ उ         ऊ         उ ३ ऋ       Î        ऋ ३ Æॡ       Æ  -         ए         ए  -         ऐ         ऐ  -         ओ        ओ  -         औ        औ  कृपया ध्यान रखें :- हृस्व में एक मात्रा अर्थात् सामान्य समय लगता है। दीर्घ में दो मात्रा अर्थात् सामान्य से दो गुना समय लगता है और प्लुत में तीन मात्रा अर्थात् सामान्य से तीन गुना समय लगता है।

हाइकु-दिवस : कृष्ण कुमार यादव के हाइकु

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हाइकु हिंदी-साहित्य में तेजी से अपने पंख फ़ैलाने लगा है. कम शब्दों (5-7-5)में मारक बात. भारत में प्रो० सत्यभूषण वर्मा का नाम हाइकु के अग्रज के रूप में लिया जाता है. यही कारण है कि उनका जन्मदिन हाइकु-दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज 4 दिसम्बर को उनका जन्म-दिवस है, अत: आज ही हाइकु दिवस भी है। इस बार हाइकुकार इसे पूरे सप्ताह तक (4 दिसम्बर - 11 दिसम्बर 2011 तक) मना रहे हैं. इस अवसर पर मेरे कुछ हाइकु का लुत्फ़ उठाएं-



टूटते रिश्ते

सूखती संवेदना

कैसे बचाएं



विद्या की अर्थी

रोज ही निकलती

योग्यता त्रस्त।



हर किसी का

फिक्स हो गया रेट

रिश्वतखोरी।




पावन शब्द

अवर्णनीय प्रेम

सदा रहेंगे।



प्रकृति बंधी

नियमों से अटल

ललकारो ना।




-कृष्ण कुमार यादव







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कृष्ण कुमार यादव : 10 अगस्त, 1977 को तहबरपुर, आजमगढ़ (उ. प्र.) में जन्म. आरंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, जीयनपुर-आजमगढ़ में एवं तत्पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वर्ष 1999 में राजनीति शास्त्र में परास्नातक. वर्ष 2001 में भारत की प्रतिष्ठित ‘सिविल सेवा’ में चयन। सम्प्रति ‘भारतीय डाक सेवा’ के अधिकारी। स…