Thursday, March 31, 2011

बेटी को भी जन्मने दो


मचल रही तो दिल में धड़कन,

उसको जीवन पाने दो।
होंठों की कोमल मुस्कानें,
गुलशन में खिल जाने दो।

नन्हा सा, मासूम सा कोमल,
गुलशन में है फूल खिला।
पल्लवित-पुष्पित होकर उसको,
जहाँ सुगन्धित करने दो।

खेले, कूदे, झूमे, नाचे,
चह भी घर के आँगन में।
चितवन की चंचलता में,
स्वर्णिम सपने सजने दो।

मानो उसको बेटों जैसा,
आखिर वह भी बेटी है।
आने वाली मधुरम सृश्टि,
उसके आँचल में पलने दो।

धोखा है यह वंश-वृद्धि का,
जो बेटों से चलनी है।
वंश-वृद्धि के ही धोखे में,
बेटी को भी जन्मने दो।
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