दिल करता है

दिल करता है कभी, लेट जाऊं और निकल जाऊं ले आत्मा को साथ,
ऊँचे नील-गगन में विचर जाऊं पर समय अभी आया नहीं,
तो जल्दी क्यों तर जाऊं काज ज़िम्मे हैं कई जीवन में, छोड़ इन्हें किधर जाऊं

भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा आकांक्षा यादव को ‘’डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2011‘‘
तू ही रहे साथ मेरे
देश के भविष्य
कैलाश मानसरोवर यात्रा वृतांत द्वारा राजीव गुप्ता
मेरी पहली दोस्त
स्त्री
इन लहु को बहुत दुःख है--- (ओशिन कुमारी )