हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

हमें क्या हो गया ?----डा.राजेंद्र तेला

>> रविवार, 6 नवम्बर 2011


हमें क्या हो गया ?


ज़मीर सो गया


सिर्फ पैसा दिख रहा


परिवार सिमट कर


यादो में रह गया


परिवार के नाम पर


मैं और मेरा रह गया


पड़ोसी से मिलना


समारोह में होता


भाई,बहन में भी


प्रोटोकॉल होता


अपना खून ही अपना


लगता


पिता का खून भी


पराया हो गया


शिक्षा का उद्देश्य


सिर्फ कमाना रह गया


"हम" से बड़ा "मैं"


हो गया


सब निरंतर देख रहे


पीड़ा को झेल रहे


फिर भी होने दे रहे


खुद को लाचार


बता रहे

आपका आना अच्छा लगता है

free counter

Footer

हिन्दी साहित्य मंच पर आप हिन्दी साहित्य ही सभी विधाओ को प्रकाशित करा सकते हैं । आप हमसे जुड़ने के लिए इस अतंरजाल पते पर संपर्क करें-hindisahityamanch@gmail.com. । हमारे इन मोबाइल नं पर भी आप संपर्क कर सकते हैं -07869206597, 09457582334 । हिन्दी साहित्य मंच पर आपका स्वागत है । हमारे प्रयास में भागीदारी बने ।

- Powered and Maintained by हिंदी होस्ट HindiHost.com The Professional Domain Hosting and Design by HindiHost.com

Back to TOP