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जिन्दगी : बस यूँ ही {कविता} सुमन ‘मीत’

>> शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011




   1

जिन्दगी की खुशियाँ
दामन में नहीं सिमटती
ऐ मौत ! आ
तुझे गले लगा लूँ...........


    2

जिन्दगी एक काम कर
मेरी कब्र पर
थोड़ा सकून रख दे
कि मर कर
जी लूँ ज़रा..........
   


  3

जिन्दगी दे दे मुझे
चन्द टूटे ख़्वाब
कुछ कड़वी यादें
कि जीने का
कुछ सामान कर लूँ........



                                                                            

7 comments:

Onkar 28 अक्तूबर 2011 7:39 pm  

Bahut khoob.

M VERMA 28 अक्तूबर 2011 8:14 pm  

जिन्दगी जीने का एक अन्दाज यह भी

संध्या आर्य 28 अक्तूबर 2011 8:27 pm  

sundar abhivyakti

संगीता स्वरुप ( गीत ) 28 अक्तूबर 2011 10:55 pm  

खूबसूरत क्षणिकाएँ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 29 अक्तूबर 2011 7:17 am  

बहुत बढ़िया!
मंगलकामनाएँ!

संगीता स्वरुप ( गीत ) 29 अक्तूबर 2011 10:42 am  

आज 29- 10 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर

kalaam-e-sajal 30 अक्तूबर 2011 10:36 am  

जिन्दगी दे दे मुझे
चन्द टूटे ख़्वाब
कुछ कड़वी यादें
कि जीने का
कुछ सामान कर लूँ........
Achhi panktiyaan

आपका आना अच्छा लगता है

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