हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

हस्ताक्षर .......(कविता).......संगीता स्वरुप

>> बृहस्पतिवार, 27 मई 2010

वातानुकूलित कक्ष में
बैठ कर
तुम करते हो फैसले
उन जिंदगियों के
जिनकी किस्मत में
बदबूदार बस्तियां हैं
कर देते हो
हस्ताक्षर
उन्हें ढहाने के
जिनकी ज़िन्दगी में
केवल झोपड़ - पट्टियाँ हैं.
क्यों कि
तुम्हारी नज़र में
शहर को सुन्दर बनाना
ज़रूरी है
पर ये
झुग्गी - झोपडियां
उनकी मजबूरी है.

मन और कक्ष तुम
सदैव बंद रखते हो
इसीलिए तुम
ऐसे फैसले कर देते हो
ज़रा अपने
मन और कमरे के
गवाक्षों को खोलो
और उनकी ज़िन्दगी के
गवाह बनो .

जिस दिन तुम
उनकी ज़िन्दगी
जान जाओगे
अपने फैसले पर
पछताओगे .
कलम तुम्हारा
रुक जायेगा
मन तुम्हारा
पीडा से
भर जायेगा
और खुद के किये
हस्ताक्षर पर
तुम्हारा ह्रदय
धिक्कार कर रह जाएगा ....

*******************************

16 comments:

माणिक 27 मई 2010 6:17 pm  

संगीता जी यहाँ आकर अच्छा लगा. एक सुझाव था कि ले आउट में कुछ कलर हल्के है जबकी पीछे का रंग भी हल्का है. थोड़ा सा पढ़ने दिक्कत होती है. अच्छा कर लेंगे तो सभी को सुविधा हो जायेगी.
सादर,

माणिक
आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से जुड़ाव
अपनी माटी
माणिकनामा

माणिक 27 मई 2010 6:26 pm  

Kavitaa bejubaan logo kee kahaani bakhubi kahatee hai.

sangeeta swarup 27 मई 2010 6:28 pm  

माणिक जी,

आपको कविता अच्छी लगी...यही मेरे लिए प्रोत्साहन है...ये ब्लॉग मेरा नहीं है...यह हिन्दीसाहित्य मंच है...रंग आदि ब्लॉग चलाने वाले ही कर सकते हैं ..

शुक्रिया सुझाव के लिए भी और सराहना के लिए भी

दिलीप 27 मई 2010 6:54 pm  

waah bahut sundar kavita achcha sandesh diya...

neeshoo 27 मई 2010 7:36 pm  

kavita samaj ke sach ko dikha rahi hai ....saral shabdon me shandaar kavita ...bahut bahut dhanyavaad

जय हिन्दू जय भारत 27 मई 2010 7:37 pm  

sangeeta ji marm asparshi rchan ke liye aapka aabhra ...

faij 27 मई 2010 7:38 pm  

bahut hi sunadr kavita dard ko ukerti hui ...badhai

हिन्दी साहित्य मंच 27 मई 2010 7:41 pm  

संगीता जी ,,आपकी लेखनी का जवाब नहीं ..जिस भी बिंदु पर लिखती है पूरी तन्मयता से ...कविता को साकार रूप दिया है .बधाई .

shikha varshney 27 मई 2010 8:00 pm  

smaaj ki sachchai ujagar karti behtareen kavita..

उम्मेद गोठवाल 27 मई 2010 8:51 pm  

लघु मानव के त्रासद जीवन की मार्मिक अभिव्यक्ति........एक तरफ वातानुकूलित कक्ष है तो दूसरी तरफ एक मात्र आशा की किरण झोपङी....प्रभावी बिम्ब...गजब का सम्प्रेषण..........सच कहूं आपकी रचना का इन्तजार रहता है..........शुभकामनाएं.........यूं ही लिखती रहे आप।

अनामिका की सदाये...... 27 मई 2010 10:58 pm  

sach ko ukerti apki rachna bahut acchhi lagi aur kash ki sacchayi jaan kar bhi vatanukulit kamro me baithe logo k dimag ki khidkiya khul paaye aur sahi faisle le paye.

Dr. shyam gupta 28 मई 2010 12:31 pm  

---कविता तो मर्मस्पर्शी है ही ,कोई दो राय नही। पर युक्ति-युक्तता से परे; झुग्गी- झौन्पडी में बैठकर कोई निर्णय कहां हो पायेगा, दिमाग ही नहीं चलेगा। क्या आज तक के इतिहास में कोई राजा झुग्गी-झौंपडी में रहा है ,कहीं भी दुनिया में ? बस देखने, शिकायत मिलने पर जांच करने, इनाम बांटने जाया करते हैं।
---झुग्गी-झौंपडियों को हटना ही चाहिये, हां पहले उनके लिये अन्य आवास व्यवस्था की जाय ।
---और यह भी सच है कि झुग्गी-झौंपडी वाले दिये गये आवासों को बेचकर पुनः झुग्गियां बना लेते हैं, इसका क्या करेंगे.

ananad banarasi 28 मई 2010 11:16 pm  

sangeeta ji maine apki kvita pdhi maph kigeye ga pr mujko ap ki kavita me wo dard nahi dikha jiske bare me ap ne likha hai

sangeeta swarup 29 मई 2010 11:53 am  

सभी पाठकों का आभार....

वन्दना 29 मई 2010 12:08 pm  

ek sarthak vishya par prashnchinh lagati rahcna........sochne ko vivash karti hai.

अर्चना तिवारी 29 मई 2010 8:31 pm  

सत्य है...सुंदर कविता

आपका आना अच्छा लगता है

free counter

Footer

हिन्दी साहित्य मंच पर आप हिन्दी साहित्य ही सभी विधाओ को प्रकाशित करा सकते हैं । आप हमसे जुड़ने के लिए इस अतंरजाल पते पर संपर्क करें-hindisahityamanch@gmail.com. । हमारे इन मोबाइल नं पर भी आप संपर्क कर सकते हैं -, 09457582334 । हिन्दी साहित्य मंच पर आपका स्वागत है । हमारे प्रयास में भागीदारी बने ।

- Powered and Maintained by हिंदी होस्ट HindiHost.com The Professional Domain Hosting and Design by HindiHost.com

Back to TOP